ग्लिट फण्ड क्या है

निवेश के  संभावनाएं

वैसे तो निवेश के बहुत सारे संभावनाएं आज के डेट में मार्केट में है . अगर हम बात करें छोटे-छोटे निवेश के लिए बैंक, पोस्ट ऑफिस, म्यूच्यूअल फंड,  इंसुरेंस.  जिसमें आज हम बात करेंगे म्युचुअल फंड इन्वेस्टमेंट की . 


म्यूच्यूअल फंड में काफी सारे फण्ड जहां निवेश किया जा सकता है इसमें एक फंड है गिल्ट फंड जोकि काफी बेहतरीन फंड है आज के डेट में म्यूचुअल फंड से सभी लोग अवगत हैं जहां ₹500 महीने से भी लोग मैचुअल फंड  में  पैसा जमा कर सकते हैं कई तरह के फंड जहां जब तक हम चाहे जमा करें जब इच्छा हो उसे निकाल भी सकते हैं . बस कुछ चीजों का ध्यान होना चाहिए, म्युचुअल फंड इन्वेस्टमेंट मार्केट के अधीन है इसीलिए इन्वेस्टमेंट मार्केट से संबंधित कुछ जानकारी होनी जरूरी है

 ग्लिट फण्ड क्या है ?

ग्लिट फण्ड एक प्रकार का मुचुअल फण्ड है जो मुख्य रुप से मध्यम और दीर्घकालिक सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश किया जता है । ग्लिट फण्ड कम जोखिम वाली डेट फण्ड  है जहा जोखिम कम होता है। जोखिम से परेशान निवेशक के लिये ग्लिट फण्ड एक बेह्तरिन विकल्प है जहा मुचुअल फण्ड मे लोग पैसा जमा कर सकते है.

ग्लिट फण्ड मे निवेशक के पैसो को सरकार कि ओर से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी की गई सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश किया जाता है इन सरकारी प्रतिभूतियों में दिनांकित प्रतिभूतियां राज्य सरकार की प्रतिभूतियां और ट्रेजरी राजस्व बिल शामिल होते हैं .

 काफी सुरक्षित फंड

इस फंड को काफी सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें जिम्मेदारी  सरकार की होती है गिल्ट फंड में निवेश करने के बाद निवेशक को किसी तरह का क्रेडिट रिस्क नहीं होता क्योंकि इन प्रतिभूतियों की गारंटी सरकार के द्वारा दी जाती है.

फंड के प्रकार :-

इसमें दो प्रकार के फंड होते हैं दीर्घ अवधि के फंड और लघु अवधि के फंड 

दीर्घ अवधि के फंड

दीर्घ अवधि के फंड के तहत सरकारी बांड में निवेश किया जाता है जिसका मेच्योरिटी पीरियड 5 से 30 वर्ष तक का होता है गिल्ट फंड में सरकारी प्रतिभूतियों की परिपक्वता अवधि जितनी अधिक होती है उतनी ही ब्याज दर में बदलाव की संभावना होती है. 

अल्पावधि के फंड

अल्पावधि के फंड में भी सरकारी बांड में ही निवेश किया जाता है यह म्युचुअल फंड के अगले 15 से 18 महीनों में ही में जोड़ हो जाते हैं. यह फंड राज्य या केंद्र सरकार द्वारा समर्थित है इसीलिए इसमें कोई क्रेडिट जोखिम नहीं होता है और इसकी कम अवधि  के कारण ब्याज दरों में बदलाव का कम जोखिम होता है सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश के कारण इन स्कीम में डिफॉल्ट का जोखिम नहीं के बराबर होता है.  लेकिन ब्याज दर का जोखिम बहुत अधिक होता है साथ ही लिक्विडिटी रिस्क भी होता है. 

 किसी भी प्रतिभूति में तब बहुत अधिक तरलता आ जाती है जब उसे आसानी से कराया जा सके उसके खरीददार और विक्रेता की संख्या लगभग बराबर हो आमतौर पर हायर लिक्विडिटी रिस्क कम होता है लेकिन जैसे ही ब्याज दरों में बढ़ोतरी होती है निवेशक अपनी इन्वेस्टमेंट को निकाल लेते हैं और जब ब्याज दरों में कमी हो जाती है तो गिल्ट फंड में इन्वेस्ट कर फायदा उठाया जाता है गिल्ट फंड में निवेश करना और उसमें पैसा लगाना चाहिए जिन्हें कुछ मार्केट की समझ हो. 

 ग्लिट फंड को इक्विटी फंड या लिक्विड फंड की तुलना में बेहतर ऐसेट क्वालिटी में निवेश करने के लिए जाना जाता है यह फंड निवेशकों के लिए सबसे अच्छा विकल्प है जो कि म्यूच्यूअल फंड  निवेश की तलाश में हैं.



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