WHAT IS DEATH CLAIM ( जीवन बीमा मृत्यु दावा) & DOCUMENTS REQUIRED
जीवन बीमा मृत्यु दावा के विषय में आम आदमी को काफी भ्रम है कि बीमा कम्पनी डेथ क्लेम मिलने में काफी दिक्कतें आते हैं । मै आपको बता दूं कि बीमा एक प्रकार का एग्रीमेंट होता है कसटमर और कम्पनी के बिच ।
अतः पालिसी लेने समय एक एक प्रश्न का उत्तर प्रस्ताव पत्र में सही सही देना जरूरी है और एजेन्ट को भी चाहिए कि कम्पनी के प्रतिनिधि होने के कारण सही सही जानकारी प्राप्त करे अर्थात सही तथ्य का उल्लेख प्रस्ताव पत्र में करे तो मृत्यु दावा बहुत ही आसान है ।
बीमा पॉलिसी एक एग्रीमेंट
वैसे जीवन बीमा पॉलिसी एक लम्बे समय का एग्रीमेंट और अच्छे विश्वास का आधार होता है साथ ही इस तथ्य पर चलता है पालिसी टर्म में मृत्यु होने पर मृत्यु क्लेम अथवा पालिसी के टर्म के समापन पर मैचूरिटी क्लेम मिलेगा । परन्तु तीन साल के अन्दर अगर मृत्यु हो जाये और वह नोर्मल मृत्यु हो , तो यह हो सकता है कि कूछ तथ्य छुपाया गया हो ,वैसे स्थितियों में उसे अर्ली डेथ कहा जाता है और क्लेम में छानबीन थोड़ा ज्यादा हो जाता है ।
डैथ क्लेम :-
अगर यह निश्चित हो जाये कि बीमाधारक का मृत्यु हो चूका हैं पालिसी टर्म के दरम्यान और मेच्योरिटी से पहले तो डैथ क्लेम प्रोसेस के बाद मिलने वाले पेमेंट को डैथ क्लेम कहते हैं ।
अगर किसी बीमित व्यक्ति की मृत्यु हो जाये तो मृत्यु के कारण विवरण के साथ नोमनी अथवा एजेन्ट या सगे-संबंधि के द्वारा मृत्यु कि सूचना ( जानकारी ) लिखित रूप कम्पनी को देना चाहिए ।
मृत्यु दावा निपटाने के चरण:-
मृत्यु दावा निपटाने के मुख्य तीन चरण हैं:-
(1) मृत्यु दावा हेतु पूर्ण आवश्यक सबूत और दस्तावेज जमा करना ।
(2) पर्ण आवश्यक दस्तावेज को कम्पनी के आफिस द्वारा प्रोसेस होना एवं छानबीन ।
(3) मृत्यु दावा का निपटारा ।
आवश्यक दस्तावेज जो मृत्यु दावा निपटाने के लिए चाहिए:-
(1) मृत्यु प्रमाण पत्र
(2) ओरिजिनल पालिसी बाउणड
(3) मृत्यु दावा फार्म जो कि कम्पनी द्वारा निर्गत हो और साथ में आवश्यक दस्तावेज ।
अगर एक्सीडेंटल मृत्यु हो तो:-
(1) एक्सीडेंटल मृत्यु दावा फार्म जो कि कम्पनी के द्वारा निर्गत हो
(2) मृत्यु प्रमाण पत्र
(3) मेडिकल प्रमाण पत्र ( पोस्ट मार्टम रिपोर्ट) जिससे मृत्यु के कारण का पता चले ।
(4) लिखित सटेटमेनट कि कहाँ और किस परिस्थितियों में एक्सिडेंट हुआ ।
(5) पूलिस एफ आइ आर कापी
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धन्यवाद् ।



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