क्या है बीमा का इतिहास और अधिनियम
क्या है बीमा का इतिहास और अधिनियम
बीमा का इतिहास बहुत पुराना है । पहले संयुक्त परिवार में अगर किसी कि मृत्यु हो जाती थी या कोई अपंग हो जाता था तो उसके पत्नि और बच्चो का देखभाल परिवार के दूसरे सदस्य करते थे , इस तरह के प्रथा भी बीमा का ही रूप था । वर्तमान में यह वयवस्था खत्म होने से बीमा कि आवश्यकता उतपन्न हूई ।
बौटमरी बाणड
प्राचीन काल में जब आज की तरह परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं थी तब भी व्यापार व्यवस्था था और एक देश से दूसरे देश में व्यापार हुआ करता था लेकिन वह समुद्री मार्ग के माध्यम से हुआ करता था और जहाँ अनेक जोखिम था और हूआ भी करता था , जिसमें जान माल कि छति हुआ करती थी । जोखिमों से बचाव हेतु व्यापारी एक समझौता कर लेते थे कि मार्ग में होने वाली हानि को व्यापारी वर्ग आपस में मिलकर जिस व्यापारी को छति हूआ उसका भरपाई करेंगे और बाद में कर्ज के रूप मे वापस लेंगे और इसे बौटमरी बाणड कहा जाता है ।इस प्रकार सर्वप्रथम सामुद्रिक बीमा व फिर अग्नि बीमा का विकास हुआ।
फायर आफिस बीमा कम्पनी
1666 मेंलंदन में एक बहुत बड़ा अग्नि काण्ड हूआ था जिसमें लगभग 13000 घर जलकर खाक हो गये थे ने बीमा को बढ़ावा दिया और 1680 मे फायर आफिस नामक बीमा कम्पनी का प्रारम्भ हूआ ।
भारत में बीमा का विकास
भारत में बीमा का विकास समय के साथ हुआ और विशेषतः इंगलैंड से विचार लिए गए हैं ।
प्रथम बीमा कम्पनी 1818 में कोलकाता में ओरियेनटल लाइभ इनसुरेनस कम्पनी भारत में प्रथम बीमा कम्पनी सुरू करने वाली कम्पनी थी ।
ब्रिटिश बीमा अधिनियम 1870 लागू होने के पश्चात बोमबे मचूअल , ओरियंटल तथा एंपायर ऑफ इंडिया की शुरुआत हुई।
भारतीय बीमा अधिनियम 1912 व्यवसाय का नियमन करने वाला प्रथम विधायक था तत्पश्चात भारतीय बीमा कंपनी अधिनियम 1928 सरकार को भविष्य निधि तथा बीमा समितियों सहित भारतीय एवं विदेशी बीमाकर्ता द्वारा भारत में जीवन एवं गैर जीवन व्यवसाय के संचालन में संखिकय सूचना एकत्रित करने की शक्ति प्रदान करता है ।
बीमाकर्ता के हितों के संरक्षण के लिए बीमा अधिनियम 1938 द्वारा पूर्व के विधायक को मजबूत तथा संशोधित किया गया जिसमें सरकार को बीमा करता पर प्रभावी नियंत्रण प्रदान किया गया ।
1950 ईस्वी में जबकि हमारा देश आजाद हो चुका था बहुत सारे बीमा कंपनी के बिच प्रतियोगिता बहुत जयादा थी। जहां सही और उचित बीमा लोगों को देना मुश्किल था अतः सरकार ने निर्णय लिया की बीमा कंपनी का राष्ट्रीयकरण किया जाए।
1956 जहां जीवन बीमा के क्षेत्र में 1 सितंबर 1956 को एक राष्ट्रीय बीमा कंपनी ( LIC ) की स्थापना हुई।
1957 सामान्य बीमा परिषद जीआईसी की स्थापना हुई ।
1972 सामान्य बीमा व्यवसाय राष्ट्रीयकरण अधिनियम पारित किया गया।
1993 में मल्होत्रा समिति का गठन किया गया जिसमें इस बात का उल्लेख किया गया कि भारत में भी निजी बीमा क्षेत्र में विदेशी बीमा कंपनी को भारतीय साझेदार के साथ काम करने का मौका दिया जाए।
1999 ईरडा कि स्थापना- मलहोत्रा समिति के प्रतिवेदन कि अनुशंसा के अनुसार बीमा उधोग के नियमन एवं विकास के लिए इनसोरेनस रेगुलेटरी एण्ड डेवलपमेंट अथॉरिटी आफ इंडिया (ईरडा) कि एक सवायत निकाय के रूप मे स्थापना की गई । ईरडा कि एक वैधानिक इकाई के रूप में अप्रिल 2000 में नियमन किया गया ।
ईरडा क्या है और यह क्या काम करती है जानने के लिए आगे जाने https://ballujee.blogspot.com/2020/08/irda.html?m=1
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